Flying bat in a marquee
Barthwal's Around the World

> आशा है आपको यहां आ कर सुखद अनुभव हुआ होगा

मंगलवार, 6 अक्तूबर 2009

तुम जो मिल गये हो




तुम मिले तो मेरे हालात बदलते चले गये
यूँ मिलते जुलते अहसास बदलते चले गये,

तन्हाई को मेरी हमसफ़र तुम सा मिल गया
जीने को मुझे सहारा अब तुम सा मिल गया

तुम्हारी झुकी पलकों के आशिक हम बन गये
चलते चलते इस राह मे हमराही हम बन गये

रात की खामोशी हो या हो दिन कि चंचलता
प्यार का अशियाना तुम्हारी बातो से है बनता

लेकर हाथो में हाथ हर पल रहता है तुम्हारा साथ
बन जाती है बिगडी बात जब रहती हो तुम साथ

-प्रतिबिम्ब बडथ्वाल
(पुरानी रचना दुसरे ब्लाग से)


आपका सहयोग - आपके विचारो और राय के माध्यम से मिलता रहेगा येसी आशा है और मुझे मार्गदर्शन भी मिलता रहेगा सभी अनुभवी लेखको के द्वारा. इसी इच्छा के साथ - प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

4 टिप्‍पणियां:

  1. रात की खामोशी हो या हो दिन कि चंचलता
    प्यार का अशियाना तुम्हारी बातो से है बनता
    behad khubsurat waah

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम मिले तो मेरे हालात बदलते चले गये
    यूँ मिलते जुलते अहसास बदलते चले गये,
    बेशक हालात बदलते रहें ...अहसास ना बदलें शुभकामनायें ..!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाणी जी आपका कहना सही है लेकिन यंहा तात्पर्य ये है कि मिलने के बाद ( मिलने जुलने से) जो अहसास पह्ले थे वे बदलते चले गये जिनमे निखार आने लगा है..

    उत्तर देंहटाएं
  4. मिलने के बाद ही सामने आती है असलियत। जय हो।

    उत्तर देंहटाएं

हमारा उद्देश्य

When we dream alone it is only a dream, but when many dream together it is the beginning of a new reality.