Flying bat in a marquee
Barthwal's Around the World

> आशा है आपको यहां आ कर सुखद अनुभव हुआ होगा

शनिवार, 26 जुलाई 2008

जीवन पथ में चलते-चलते


जीवन पथ में चलते-चलते
हर एक ढूँढे रास्ते अपने-अपने

दौड़ती जिंदगी और भागते लोग
कहाँ से कहाँ पहुंचे गये हम लोग

सबका जीने का अलग है ढंग
दुनिया के साथ बदला है रंग

दूर हुये हम कहीं यूँ अपनों से
जोड़ लिये रिश्ते कुछ दूसरो से

काश कुछ इस तरह हो जाता
फ़िर रिश्ता हमारा जुड़ जाता।

आओ हम फ़िर आज साथ चले
कल को छोड़ कल कि ओर चले

-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
    ---
    आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
    ---
    अमित के. सागर
    (उल्टा तीर)

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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When we dream alone it is only a dream, but when many dream together it is the beginning of a new reality.